Category Archives: विवाह

विवाह का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, नियम एवं उद्देश्य

विवाह का अर्थ विवाह का शाब्दिक अर्थ है, ‘उद्वह’ अर्थात् ‘वधू को वर के घर ले जाना।’ विवाह को परिभाषित करते हुए लूसी मेयर लिखते हैं, विवाह की परिभाषा यह है कि वह स्त्री-पुरुष का ऐसा योग है, जिससे स्त्री से जन्मा बच्चा माता-पिता की वैध सन्तान माना जाये। इस परिभाषा में विवाह को स्त्री… Read More »

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम एवं कारण

वर्तमान में दहेज एक गम्भीर समस्या बनी हुई है। इसके कारण माता-पिता के लिए लड़कियों का विवाह एक अभिशाप बन गया है। सामान्यत: दहेज उस धन या सम्पत्ति को कहते हैं जो विवाह के समय कन्या पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाता है। फेयरचाइल्ड के अनुसार, दहेज वह धन सम्पत्ति है जो विवाह के अवसर… Read More »

बहिर्विवाह क्या है?

बहिर्विवाह से तात्पर्य है कि एक व्यक्ति जिस समूह का सदस्य है उससे बाहर विवाह करे। रिवर्स लिखते हैं, बहिर्विवाह से बोध होता है उस विनिमय का जिसमें एक समाजिक समूह के सदस्य के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह दूसरे सामाजिक समूह से अपना जीवन साथी ढूँढ़े। हिन्दुओं में बहिर्विवाह के नियमों के… Read More »

हिन्दू विवाह के प्रकार और विशेषताएँ

हिन्दू विवाह का एक आधार स्त्री में माँ एवं पुरुष में पिता बनने की इच्छा भी है, जिसकी पूर्ति वैध रूप में विवाह द्वारा ही सम्भव है। हिन्दू विवाह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को संस्कृति का हस्तान्तरण भी करता है। कुछ समाजों में आर्थिक जीवन विषमलिंगियों के बीच सहयोग एवं श्रम-विभाजन पर आधारित होता है।… Read More »

हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 क्या है?

हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 यह अधिनियम 18 मई, 1955 से प्रभावी हुआ और जम्मू और कश्मीर को छोड़कर समस्त भारत में लागू होता है। इस अधिनियम में ‘हिन्दू’ शब्द में जेन, बौद्ध, सिख और अनुसूचित जातियां सम्मिलित है। किन्हीं दो हिन्दुओं के बीच इस अधिनियम के अन्तर्गत निम्नलिखित शर्ते प्रदान की गई है:- किसी भी… Read More »

अंतर्विवाह क्या है?

अंतर्विवाह का तात्पर्य है एक व्यक्ति अपने जीवन-साथी का चुनाव अपने ही समूह में से करे। इसे परिभाषित करते हुए डॉ. रिवर्स लिखते हैं, अन्त:विवाह से अभिप्राय है उस विनिमय का जिसमें अपने समूह में से जीवन-साथी का चुनाव अनिवार्य होता है। वैदिक एवं उत्तर-वैदिक काल में द्विजों का (ब्राह्मण, क्षत्रीय एवं वैश्य) एक ही… Read More »

अनुलोम विवाह तथा प्रतिलोम विवाह क्या है?

जब एक उच्च वर्ण, जाति, उपजाति, कुल एवं गोत्र के लडके का विवाह ऐसी लड़की से किया जाय जिसका वर्ण, जाति, उपजाति, कुल एवं वंश के लडके से नीचा हो तो ऐसे विवाह को अनुलोम विवाह कहते हैं। दूसरे शब्दों में इस प्रकार के विवाह में लड़का उच्च सामाजिक समूह का होता है और लड़की… Read More »

हिन्दू विवाह के उद्देश्य

भारतीय समाज में प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति के लिए विवाह एक अनिवार्य शर्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हिन्दुओं के पुरूशार्थ में धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को व्यक्ति के जीवन का लक्ष्य माना गया है, जिनकी पूर्ति विवाह द्वारा ही सम्भव है। हमारे समाज में अविवाहित व्यक्ति को अपवित्र माना गया है, तथा… Read More »