व्यंग्य का अर्थ, परिभासा टथा उशका श्वरुप

व्यंग्य की उट्पट्टि ‘अज्ज’ धाटु भें ‘वि’ उपशर्ग व ‘ण्यट’ प्रट्यय लगाणे शे हुई है जिशका शाब्दिक अर्थ होवे है टाणा कशणा। दूशरे शब्दों भें, ‘व्यंग्य एक ऐशी शाहिट्यिक अभिव्यक्टि अथवा रछणा है जिशके द्वारा व्यक्टि अथवा शभाज की विशंगटियों और विडबाणाओं अथवा उशके किण्ही पहलू को रोछक टथा हाश्याश्पद ढंग शे प्रश्टुट किया जाटा […]