Category Archives: व्यापार

व्यापार के प्रकार

व्यापार के प्रकार भारत के व्यापार को दो भागों में बांटा गया हैं। आंतरिक व्यापार विदेशी व्यापार। आंतरिक व्यापार-  जब दो या दो से अधिक व्यक्ति फर्म संगठन या संगठन राज्य देश की सीमा के भीतर वस्तुओ का आदान प्रदान करते हैं तो उसे आंतरिक व्यापार कहते हैं। जैसे जूट पश्चिम बंगाल मे कपास महाराष्ट्र… Read More »

विदेशी व्यापार का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

विदेशी व्यापार का अर्थ उस व्यापार से है जिसके अंतर्गत दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं आरै सेवाओं का विनिमय किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि भारत अमेरिका से व्यापार करता है तो यह विदेशी व्यापार होगा। इसे इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि प्रत्येक देश अन्य देशों से… Read More »

साझेदारी व्यापार क्या है?

जब दो या दो से अधिक व्यक्ति लाभ कमाने के उद्देश्य से आपस में मिलकर किसी व्यापार को चलाने के लिये सहमत हो जाते हैं तो उनके बीच स्थापित संबंध को साझेदारी कहा जाता हैं। भारतीय साझेदारी अधिनियम,1932 की धारा (4) के अनुसार- ‘साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच का आपसी संबंध हैं जो किसी व्यवसाय… Read More »

विज्ञापन क्या है?

एक समाचार-पत्र में आपको न केवल ताजा घटनाओं अथवा खेल संबंधी समाचार पढ़ने को मिलते हैं, बल्कि एअर कंडीशनर, साइकिलों, बालों में लगाने वाले तेलों, ट्रांसपोर्टरों, भवन-निर्माताओं आदि द्वारा अपने उत्पाद अथवा सेवाओं के बारे में दी गई सूचनाएं अथवा संदेश भी पढ़ने को मिलते हैं। इस तरह की सूचनाएं आपको पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन और… Read More »

बीजक क्या है ?

विक्रेता द्वारा क्रता को बेचे हुए माल का विवरण तैयार करके दिया जाता है, उसे बीजक कहते है। इस विवरण में बेचे हुए माल की मात्रा, माल की किस्म, माल की दर, माल का मूल्य एवं क्रेता को दी जाने वाली छूटों का वर्णन रहता है इसमे माल पर किये जाने वाले व्ययों को जोड़कर… Read More »

फुटकर व्यापार का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएँ

छोटे दुकानदार जो उपभोक्ता के सीधे ही सामान बेचते हैं, उन्हें फुटकर विक्रेता कहते हैं। पैदल चलकर सामान बेचने वाले, पेफरी वाले, एक दाम की दुकान, परचून की दुकान चलाने वाले सभी पुफटकर व्यापारी है। पुफटकर विक्रेता, मध्यस्तों के बीच की अंतिम कड़ी होता है। वह थोक विक्रेता तथा वास्तविक उपभोक्ता के बीच का माध्यम… Read More »

सुपर बाजार क्या है?

सुपर बाजार या मिला-जुला भण्डार का अर्थ उस फुटकर व्यापारिक संस्था से है जो विभिन्न प्रकार की दैनिक आवश्यकता की वस्तुएँ नकद या स्वयं-सेवा के आधार पर बेचती है। अन्य शब्दों में, सुपर बाजार एक बड़े पैमाने पर विभागीय फुटकर व्यापार करने वाली संस्था है जो विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का व्यापार करती है, स्वयं-सेवा… Read More »

थोक व्यापारी का अर्थ, विशेषता एवं कार्य

थोक व्यापारी से आशय ऐसे व्यापारी से है, जो उत्पादकों से बड़ी मात्रा में वस्तुओं को क्रय करकके थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फुटकर व्यापारियों को बेचता है। थोक व्यापारी निर्माता एवं फुटकर व्यापारियों के बीच की कड़ी है। यह निर्माता और फुटकर व्यापारियों के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है। ‘थोक व्यापारी फुटकर अथवा अन्य व्यापारियों… Read More »

विभागीय भंडार क्या है?

इसमें एक ही भवन में कर्इ प्रकार का सामान मिल जाता है। पूरे भवन को अनेक विभागों या काउंटरों में विभाजित कर देते हैं। प्रत्येक विभाग में एक प्रकार का सामान जैसे स्टेशनरी, किताबें उपलब्ध होते हैं। ये सभी विभाग एक ही मुख्य प्रबंधन के द्वारा नियंत्रित होते हैं। एक बार यदि आप एक विभागीय… Read More »

निर्यात व्यापार क्या है?

किसी अन्य देश को माल बेचना निर्यात व्यापार कहलाता है। देश को समृद्धशाली बनाने के लिए निर्यात में वृद्धि आवश्यक है। आयातों के मूल्य का भुगतान निर्यात करते हैं अत: निर्यात द्वारा ही विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है और इस अर्जित मुद्रा से ही आवश्यक वस्तुए मशीन, दवाइयॉं, कच्चा माल आदि विदेशों से… Read More »