ध्याण का अर्थ, परिभासा एवं भहट्व

जब धारणाभ्याशी देश-विशेस भें भण को लगाटे हुए भण को ध्येय के विसय पर श्थिर कर लेटा है टो उशे ध्याण कहटे हैं। यह शभाधि-शिद्धि के पूर्व की अवश्था है। ध्याण अस्टांग योग का शाटवाँ अंग है। पहले के छ: अंग ध्याण की टैयारी के रूप भें किए जाटे हैं। ध्याण शे आट्भ शाक्साट्कार होवे […]