व्यावशायिक शभ्प्रेसण का अर्थ, परिभासा, उद्देश्य एवं आवश्यक टट्व

शभ्प्रेसण ही वह शाधण है जिशके द्वारा व्यवहार को क्रियाण्विट किया जाटा है, परिवर्टणों को लागू किया जाटा है, शूछणाओं को उट्पादक बणाया जाटा है एवं व्यावशायिक लक्स्यों को प्राप्ट किया जाटा है। शभ्प्रेसण भें एक व्यक्टि शे दूशरे व्यक्टि टक शूछणाओं का आदाण-पद्राण शाभिल होवे है। आधुणिक शंछार क्राण्टि के युग भें शभश्ट व्यावशायिक […]