Category Archives: व्यावहारिक मनोविज्ञान एवं योग

फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त

मनोविज्ञान के क्षेत्र में सिगमण्ड फ्रायड के नाम से प्राय: सभी लोग परिचित है। फ्रायड ने व्यक्तित्व के जिस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, उसे व्यक्तित्व का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त कहा जाता है। फ्रायड का यह सिद्धान्त उनके लगभग 40 साल के वैदानिक अनुभवों पर आधारित है। क्या आप जानते हैं कि व्यक्तित्व का अध्ययन करने वाला… Read More »

मनोवैज्ञानिक परीक्षण के प्रकार

क्या आप जानते हैं कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण कितने प्रकार के होते हैं?  मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक मानवीकृत यन्त्र होवे है, जिसमें प्रश्नों अथवा चित्रों या अन्य माध्यमों के द्वारा मनुष्य की विभिन्न मानसिक योग्यताओं जैसे कि बुद्धि, समायोजन क्षमता, स्मृति, अभिवृत्ति, अभिरूचि इत्यादि का मात्रात्मक मापन किया जाता है। कहने का आशय यह है कि मनोवैज्ञानिक… Read More »

स्मृति (मेमोरी) का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

प्राय: हम यह सुनते हैं कि अमुक व्यक्ति की स्मृति बहुत अच्छी है। अमुक व्यक्ति बार-बार भूल जाता है। कई व्यक्ति अपनी स्मृति में कई सूचनाओं को एक साथ रख लेते हैं। बहुत बार हम बचपन की बातों को स्मृति में ले आते हैं तो बहुत बार हम वर्तमान की बातों को भी भूल जाते… Read More »

चिंता का अर्थ, परिभाषा एवं लक्षण

चिंता वस्तुत: एक दु:खद भावनात्मक स्थिति होती है। जिसके कारण व्यक्ति एक प्रकार के अनजाने भय से ग्रस्त रहता है, बेचैन एवं अप्रसन्न रहता है। चिंता वस्तुत: व्यक्ति को भविष्य में आने या होने वाली किन्ही भयावह समस्या के प्रति चेतावनी देने वाला संकेत होवे है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिन-प्रतिदिन की जिन्दगी में… Read More »

व्यसन का अर्थ, प्रकार, लक्षण एवं कारण

व्यसन एक द्रव्य सम्बन्धी विकृति है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में विभिन्न प्रकार के रसायन द्रव्यों का सेवन करता है और इन द्रव्यों पर इतनी अधिक निर्भरता बढ़ जाती है कि इनके दुष्प्रभावों से परिचत होते हुए भी वह इनको लेने के लिये विवश हो जाता है, क्योंकि न लेने पर उसके शरीर और मन… Read More »

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धांत

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धान्त ‘‘नवमनी विश्लेषणात्मक उपागम’’ पर आधारित है। एडलर यद्यपि फ्रायड के काफी नजदीक थे, किन्तु वे व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रायड के कुछ विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने फ्रायड से पृथक होकर एक नये व्यक्तित्व सिद्धान्त को जन्म दिया, जिसका नाम रखा – ‘‘वैयक्तित्व मनोविज्ञान का सिद्धान्त’’ इस सिद्धान्त की… Read More »

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत

1. एरिक्सन ने मानवीय प्रकृति में तीन तत्वों को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना हैं, जो है-   पूर्णतावाद  पर्यावरणीयता  परिवर्तनशीलता  2. एरिक्सन ने मानव प्रवृति के कुछ अन्य पक्षों जैसे कि वस्तुनिष्ठता अग्रलक्षता  निर्धार्यता ज्ञेयता विषम स्थिति को अपने सिद्धान्त में अन्य पहलुओं की अपेक्षा कम महत्व प्रदान किया है। ने अपना ध्यान मूल रूप् से इस… Read More »

व्यावहारिक मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

व्यावहारिक मनोविज्ञान मनोविज्ञान का एक पक्ष है जिसके अन्तर्गत मानव की विभिन्न समस्याओं के सुलझाने में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है। व्यावहारिक मनोविज्ञान के विकास पर सर्व प्रथम पैटर्सन ने व्याख्या की। उन्होने व्यावहारिक मनोविज्ञान के विकास के चार चरण बताए – प्रथम चरण गर्भावस्था, द्वितीय चरण जन्मकाल, तीसरा चरण बाल्यावस्था और चौथा… Read More »

मनोवैज्ञानिक परीक्षण क्या है?

यदि सामान्य बोलचाल की भाषा में प्रश्न का उत्तर दिया जाये तो कहा जा सकता है कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण व्यावहारिक रूप से किन्ही व्यक्ति का अध्ययन करने की एक ऐसी व्यवस्थित विधि है, जिसके माध्यम से किन्ही प्राणी को समझा जा सकता है, उसके बारे में निर्णय लिया जा सकता है, उसके बारे में निर्णय… Read More »