Category Archives: संगीत

घराना क्या है घराने का इतिहास

घराने का अर्थ कुछ विशेषताओं का पीढ़ी दर पीढ़ी चले आना अर्थात गुरु शिष्य परंपरा को घराना कहा जाता है। गायकी से घराने का निर्माण माना है जैसे एक गायक ने कुछ शिष्य बनाए और उन्होंने कुछ और शिष्य तैयार किए, इस तरह शिष्यों की पीढ़ी चलती गई, जिसे घराना कहा गया। तानसेन के वंशजों… Read More »

तबला का इतिहास

तबला शब्द की व्युत्पत्ति शब्द संरचना की दृष्टि से तब्ल शब्द मूलतः ‘त’ ‘ब’ और ‘ल’ इन तीन वर्णों से मिलकर बना है।  मध्ययुग में मृदंग अर्थात् पखावज को बीच से काटकर दो हिस्सों में ऊध्र्वमुखी स्थिति में रखकर बजाने से तबला की उत्पत्ति हुई है। इस तरह पखावज के दो भाग करने पर भी… Read More »

वाद्य यंत्र के प्रकार

वाद्य यंत्र अर्थ है, ‘‘वाद्यनिय’’ या बजाने योग्य यन्त्र विशेष। यह शब्द वद्य धातु से उत्पन्न होवे है। वद्य धातु स्पष्ट उच्चारण करने के अर्थ में प्रयोग होती है- ‘‘वदतीति वाद्यम्’’ जो बोलता है, वही वाद्य यंत्र है। वास्तव में वाद्यों को बजाने में हमें स्वर व शब्द बोलते हुए प्रतीत होते है। प्राचीन संस्कृति साहित्य में… Read More »

संगीत की परिभाषा, उत्पत्ति एवं विकास

अर्थात् ब्रह्माजी ने जिस संगीत को शोधकर निकाला भरत मुनि ने महादेव जी के सामने जिनका प्रयोग किया तथा जो मुक्तिदायक है वह मार्गीय संगीत कहलाता है।  संगीत का विकास सृष्टि की उत्पत्ति के साथ ही हुआ। ब्रह्मा जी ने शकर को भैरव राग सिखाया तथा शकर जी ने उस भैरव राग को नाना प्रकार… Read More »

संगीत का अर्थ, परिभाषा, उत्पत्ति एवं मुख्य तत्व

संगीत का अर्थ संगीत की व्युत्पति “सम् गै (गाना) + कत” है अर्थात् ‘गै’ धातु में ‘सम’ उपसर्ग लगाने से यह शब्द बनता है। ‘गै’ का अर्थ है – ‘गाना’ और सम (सं) एक अव्यय, है, जिसका व्यवहार समानता, संगति, उत्कृष्टता, निरन्तरता, औचित्य आदि को सूचित करने के लिये किया जाता है। अत: संगीत का… Read More »

बंदिश का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं महत्व

पाँच ललित कलाओं में संगीत कला को सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। संगीत का मूल आधार लय और स्वर है जिसके माध्यम से कलाकार अपने सूक्ष्म से सूक्ष्म भावों को अभिव्यक्त करता है। जिस भांति निर्गुण ब्रह्म की उपासना सर्वसाधरण के लिए सम्भव न होने के कारण ईश्वर को सहज रूप में पहचानने और जानने के… Read More »

भारतीय संगीत का इतिहास

वस्तुत: सम्पूर्ण जगत संगीतमय है। अनादि काल से ही झरनों की झर-झर, वनों की सर-सर, नदियों की कल-कल, पक्षियों की चहचहाहट, भ्रमरों की गुनगुनाहट, सारंग की तरंग ध्वनि, विभिन्न पशुओं की भिन्न-भिन्न बोली इत्यादि में अर्थात् कहने का तात्पर्य यह है कि विश्व की प्रत्येक गति या प्रवाह में संगीत निरंतर गुंजायमान है। ‘‘यद्यपि संगीत… Read More »

लोक संगीत का अर्थ एवं परिभाषा

लोक संगीत का अलोक संगीत शब्द में ‘लोक’ और ‘संगीत’ दो अलग-अलग शब्द हैं। हिन्दी व्याकरण की दृष्टि से लोक संगीत एक समस्त पद है। ‘लोक’ तथा ‘संगीत’ के बीच तत्पुरुष कारक की षष्ठी विभक्ति ‘कर’ के लोप हो जाने से लोक संगीत शब्द समान रूप से व्यवंत होवे है। इसलिए लोक संगीत शब्द का… Read More »

भारतीय संगीत के प्रकार

संगीत मूलतः संस्कृत भाषा का शब्द है। जिसकी व्युत्पत्ति गै शब्द के पूर्व ‘सम’ उपसर्ग लगाकर हुयी है। संगीत शब्द में सम् उपसर्ग का तात्पर्य वादन और नर्तन से है। अर्थात् गायन के साथ वादन और नर्तन का भी प्रयोग होवे है तभी संगीत की विद्या पूर्ण होती है।’’   भारतीय संगीत के प्रकार संगीत के… Read More »