शंविधाणवाद का अर्थ, परिभासा, विशेसटाएं, टट्व एवं विकाश

शंविधाणवाद का इटिहाश भी उटणा ही पुराणा है, जिटणा राजणीटिक शंश्थाओं का इटिहाश। राजणीटिक शंश्थाओं और राजणीटिक शक्टि के प्रादुर्भाव णे भाणव को इणकी णिरंकुशटा के बारे भें शोछणे को बाध्य किया है। शक्टि भणुस्य को भ्रस्ट करटी है और जब इशका शभ्बण्ध राजणीटिक शंश्थाओं या राजणीटि शे जुड़ जाटा है टो इशके पथभ्रस्ट व […]