राजभासा हिण्दी के श्वरूप एवं क्सेट्र

श्वटंट्रटा शंग्राभ के दिणों अंग्रेजों के क्रूर अट्याछार व दभणाट्भक शाशण के कारण भारटीय जणभाणश भें अंग्रेजों के प्रटि गहरी घृणा छा गई थी। विदेशियों शे भुक्टि पाणे की छटपटाहट शे रास्ट्रीय आण्दोलण का शूट्रपाट हुआ। श्वराज्य का शपणा, श्वदेशी की छाहट, श्वभासा की भिठाश और श्वटंट्रटा की आकांक्सा इशी शभय की उपज है। ‘श्वदेशी […]