Category Archives: समकालीन राजनीतिक विचार एवं सिद्धांत

अरविन्द घोष के राजनीतिक विचार

अरबिन्द कांग्रेस की उदारवादी नीतियों के कटु आलोचक थे। जब वे इंग्लैण्ड से वापिस आए तो उस समय कांग्रेस पर उदारवादी नेताओं का कब्जा था। उनका मुख्य काम अंग्रेजों को ज्ञापन सौंपने तक ही सीमित था। अंग्रेज सरकार उनकी तनिक भी परवाह नहीं करती थी। इसलिए अरबिन्द ने उनकी कार्य प्रणाली अच्छी नहीं लगी और… Read More »

गांधी जी के राजनीतिक विचार

भारतीय राजनीतिक चिन्तन में गांधी जी का एक अति महत्वपूर्ण स्थान है। गांधी जी का दर्शन बहुमुखी है। उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र को स्पर्श किया है। यद्यपि उनके विचार प्लेटो, अरस्तु, हॉब्स व लॉक आदि राजनीतिक विचारकों की तरह क्रमबद्ध नहीं है, लेकिन फिर भी अनेक विद्वान उन्हें एक उच्चकोटि का राजनीतिक विचारक मानते… Read More »

राजनीतिक सिद्धांत क्या है?

राजनीतिक सिद्धांत एक ऐसा पदबन्ध है जिसे राजनीतिक चिन्तन, राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक विचार, राजनीतिक विश्लेषण, राजनीतिक परीक्षण, राजनीतिक विचारधारा, राजनीतिक व्यवस्था के सिद्धांत आदि के पयार्य के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। राजनीतिक सिद्धांत और राजनीतिक दर्शन को तो आज भी समानार्थी माना जाता है। लेकिन वास्तव में ये दोनों शब्द एक जैसे… Read More »

व्यवहारवाद का अर्थ, परिभाषा, कार्यक्षेत्र, विशेषताएं

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद राजनीति शास्त्र के क्षेत्र में जिस नए दृष्टिकोण का जन्म हुआ, वह है-व्यवहारवादी दृष्टिकोण, द्वितीय विश्व युद्ध से पहले राजनीति शास्त्र का अध्ययन परम्परावादी दृष्टिकोण से किया जाता था। इस दृष्टिकोण के दोषों तथा सैद्धान्तिक कठोरता के सभी जागरुक राजनीतिक विश्लेषकों में वैचारिक असंतोष को जन्म दिया। इस वैचारिक असंतोष के… Read More »

मार्क्सवाद के सिद्धांत

मार्क्सवाद को सर्वप्रथम वैज्ञानिक आधार प्रदान करने का श्रेय कार्लमार्क्स व उसके सहयोगी एंजिल्स को जाता है। फ्रांसीसी विचारकों सेण्ट साईमन तथा चाल्र्स फोरियर ने जिस समाजवाद का प्रतिपादन किया था, वह काल्पनिक था। मार्क्स ने अपनी पुस्तकों ‘Das Capital’ तथा ‘Comunist Manifesto’ के वैज्ञानिक समाजवाद का प्रतिपादन किया। वेपर ने कहा है कि ‘‘पूर्ववर्ती… Read More »

जॉन रॉल्स का जीवन परिचय एवं सिद्धांत

जॉन रॉल्स का जन्म 21 फरवरी 1921 को अमेरिका में हुआ। जॉन रॉल्स की बचपन से ही सामाजिक समस्याओं को समझने में रुचि थी। जॉन रॉल्स एक विलक्षण प्रतिभा रखने वाले व्यक्ति थे। अपनी परिपक्व आयु में जॉन रॉल्स ने सामाजिक विषमताओं को समझकर अपने विचारों को पत्र-पत्रिकाओं में छपवाकर एक बुद्धिजीवी होने का परिचय… Read More »

फासीवाद का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

फासीवाद शब्द की उत्पत्ति इटालियन भाषा के शब्द ‘Fascio’’से हुई है। इसका अर्थ है-’लकड़ियों का बंधा हुआ गठ्ठा’। यह शब्द रोम में राजचिन्ह को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता था। इसमें लकड़ियों के साथ एक कुल्हाड़ा भी रखा जाता था। लकड़ी का गट्ठा एकता का तथा कुल्हाड़ी राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक था। इटली में… Read More »

प्रत्यक्षवाद क्या है?

प्रत्यक्षवाद वह सिद्धान्त है जो केवल वैज्ञानिक पद्धति से प्राप्त ज्ञान को ही अपर्युक्त, विश्वसनीय व प्रामाणिक मानता है। प्रत्यक्षवादियों का मानना है कि प्रत्यक्षवाद विज्ञान की मदद से उद्योग, उत्पादन एवं आर्थिक प्रगति के लिए आशा की किरण है। इस दृष्टि से मार्क्स का वैज्ञानिक भौतिकवाद भी प्रत्यक्षवाद के ही निकट है, क्योंकि मार्क्स… Read More »

उदारवाद का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

‘उदारवाद’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘Liberalism’ का हिन्दी अनुवाद है। इसकी उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘Liberty’ से हुई है। इस दृष्टि से यह स्वतन्त्रता से सम्बन्धित है। इस अर्थ में उदारवाद का अर्थ है ‘व्यक्ति की स्वतन्त्रता का सिद्धान्त।’ ‘Liberalism’ शब्द लेटिन भाषा के ‘Liberalis’ शब्द से भी सम्बन्धित माना जाता है। इस शब्द… Read More »

अंतोनियो ग्रामसी का जीवन परिचय एवं राजनीतिक विचार

अंतोनियो ग्रामसी का जन्म 22 जनवरी, 1891 को इटली के सार्डिनिया प्रान्त के अलेस गांव में हुआ। उसकी मां का नाम ज्युसेपिना मर्सियस तथा पिता का नाम फ्रांसिस्को ग्रामसी था। उसका पिता एक राजस्व अधिकारी था। 27 अक्टूबर 1900 को उसके पिता को उसके राजनीतिक विरोधियों द्वारा भ्रष्टाचार के झूठे मामले में जेल भिजवा दिया।… Read More »