Category Archives: समाजशास्त्र

राज्य और समाज में अंतर

जैसे कि आप जानते है, राज्य एक राजनीति समाज है, जिसके चार घटक है- जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार, संप्रभुता। आप जानते है कि राज्य कानून के माध्यम से स्वाभाविक रूप से दमनकारी शक्ति का प्रयोग करके सामाजिक आचार-विचार को नियंत्रित रखता है। एक संकल्पना के रूप में समाज एक संगठन भी है और सामाजिक संबंधों… Read More »

राज्य और सरकार

जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार राज्य का एक घटक है। यह वह संस्था है जहां पर कानून बनाये और लागू किये जाते हैं और उन नियमों का उल्लंघन करने वालों को दण्ड मिलता है। यही राज्य का प्रत्यक्ष रूप है। इसमें राज्य के सभी लोग, संगठन और संस्थाएँ शामिल हैं जिनके द्वारा राज्य… Read More »

समाज विज्ञान क्या है?

समाजशास्त्र अन्य समाज विज्ञानों के साथ सम्बन्धों को बताने से पहले हमें समाज विज्ञानों के अर्थ को स्पष्ट कर लेना चाहिये। सभी समाजविज्ञानों का महत्वपूर्ण उद्देश्य मनुष्य जाति के विकास को आगे बढ़ाना है। अन्ततोगत्वा सम्पूर्ण मनुष्य समाज का एक मात्र मुहावरा मनुष्य को सुखी और खुशहाल बनाना है। मनुष्य की भिन्न-भिन्न आवश्यकताएँ और इच्छाएं… Read More »

समाजशास्त्र क्या है?

समाज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास ‘समाजशास्त्र‘ द्वारा किया जाता है जोकि एक नया सामाजिक विज्ञान है। एक अलग विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का अध्ययन सबसे पहले फ्रांसिसी विचारक आगस्ट कोंत द्वारा अपनी प्रमुख कृति ‘‘पॉजिटिव फिलॉसफी’’ में 1838 ई. में किया गया। इसीलिए ऑगस्त कोंत को ‘समाजशास्त्र का जनक’ कहा जाता… Read More »

सामाजिक मूल्य का अर्थ, परिभाषा प्रकार एवं महत्व

मूल्य समाज के प्रमुख तत्त्व हैं तथा इन्हीं मूल्यों के आधार पर हम किसी समाज की प्रगति, उन्नति, अवनति अथवा परिवर्तन की दिशा निर्धारित करते हैं। इन्हीं मूल्यों द्वारा व्यक्तियों की क्रियाएँ निर्धारित की जाती हैं तथा इससे समाज का प्रत्येक पक्ष प्रभावित होता है। सामाजिक मूल्यों के बिना न तो समाज की प्रगति की… Read More »

समाज का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं प्रमुख तत्व

समाज शब्द संस्कृत के दो शब्दों सम् एवं अज से बना है। सम् का अर्थ है इक्ट्ठा व एक साथ अज का अर्थ है साथ रहना। इसका अभिप्राय है कि समाज शब्द का अर्थ हुआ एक साथ रहने वाला समूह। मनुष्य चिन्तनशील प्राणी है। मनुष्य ने अपने लम्बे इतिहास में एक संगठन का निर्माण किया… Read More »

समुदाय का अर्थ, परिभाषा एवं प्रमुख विशेषताएँ

हम सभी किसी एक गाँव अथवा नगर में निवास करते हैं। प्रत्येक गाँव एवं नगर की निश्चित सीमाएँ होती हैं। इसीलिए गाँव एवं नगर समुदाय के दो प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं। व्यक्ति का अपने गाँव अथवा नगर में सामान्य जीवन व्यतीत होता है तथा वह अपनी पहचान अपने गाँव या नगर के नाम से… Read More »

समिति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ एवं अनिवार्य तत्व

समिति व्यक्तियों का एक समूह है जो कि किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु बनाया जाता है। उस उद्देश्य की पूर्ति हेतु समाज द्वारा मान्यता प्राप्त नियमों की व्यवस्था को संस्था कहते हैं। बहुत से लोग इन दोनों को समान अर्थों में प्रयोग करते हैं जो कि उचित नहीं है। ऐसा भ्रम इन दोनों शब्दों… Read More »

दुर्खीम का आत्महत्या का सिद्धांत

फ्रांस के सामाजिक विचारकों में दुर्खीम को ऑगस्ट कॉम्ट का उत्तराधिकारी माना जाता है। क्योंकि दुर्खीम ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक धरातल प्रदान किया। इनका जन्म 15 अप्रैल 1858 सन् में पूर्वी फ्रांस के लॉरेन प्रान्त में स्थित एपिनाल (Epinal) नामक नगर में एक महूदी परिवार में हुआ था। इनके पारिवारिक व शैक्षणिक जीवन के बाद… Read More »