Category Archives: समाज कार्य

सामाजिक निदान का अर्थ

निदान के सम्बन्ध में सभी निदानात्मक सम्प्रदाय के विचारकों ने अपने-अपने मत प्रस्तुत किये हैं। परन्तु उन सभी मतों और विचारों का मूल अर्थ लगभग समान है। यहाँ पर हम कुछ विद्वानों की परिभाषाओं एवं विचारों का उल्लेख निदान शब्द को स्पष्ट करने के लिए कर रहे है। रिचमण्ड, मेरी, सामाजिक निदान, जहाँ तक सम्भव… Read More »

व्यावसायिक सामाजिक कार्य का विकास

सन् 1935 मे सामूहिक कार्यकताओं मे व्यावसायिक चेतना जागृत हु इस वर्ष समाज कार्य की राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में सामाजिक सामूहिक कार्य को एक भाग के रूप में अलग से एक अनुभाग बनाया गया इसी वर्ष सोशल वर्क यर बुक में सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य पर अलग से एक खण्ड के रूप में क लेख प्रकाशित… Read More »

वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा, विशेषताएँ, उद्देश्य

भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित… Read More »

सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य के क्षेत्र

सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य में समाज कार्य की एक प्रणाली के रूप में विकास के साथ-साथ इसकी प्रविधियों, आधारभूत मूल्यों, धारणाओं तथा कार्य पद्धति में अन्तर आता गया। प्रारम्भ में वैयक्तिक सेवा कार्य का उद्देश्य सहायता प्रदान करना था। परन्तु बाद में मनोविज्ञान तथा मनोविकार विज्ञान के प्रभाव के कारण व्यक्तित्व एवं व्यवहार सम्बन्धी उपचार… Read More »

मानव विकास की नीतियां एवं कार्यक्रम

मानव विकास की अवधारणा मानवीय विकास से संबंधित है जिसका मुख्य उद्देश्य किन्ही भी राष्ट्र से जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक पक्षों को प्रभावित करना है। चूँकि मानवीय विकास एक बृहद् अवधारणा है अत: इसके अंतर्गत समाज के विभिन्न वर्गों व उनसे संबंधित मुद्दों को ध्यान में रखते हुए नीतियों एवे कार्यक्रमों का… Read More »

ग्रामीण विकास क्या है?

ग्रामीण विकास एवं बहुआयामी अवधारणा है जिसका विश्लेशण दो दृष्टिकोणों के आधार पर किया गया है: संकुचित एवं व्यापक दृष्टिकोण। संकुचित दृष्टि से ग्रामीण विकास का अभिप्राय है विविध कार्यक्रमेां, जैसे- कृषि, पशुपालन, ग्रामीण हस्तकला एवं उद्योग, ग्रामीण मूल संरचना में बदलाव, आदि के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना। वृहद दृष्टि से ग्रामीण विकास… Read More »

नगरीय विकास क्या है?

भौगोलिक एवं प्राकृतिक भू-भाग को समाज वैज्ञानिकों ने विविध आधारों पर बाँटा है: महाद्वीप एवं महादेशीय आधार पर वर्गीकरण, राष्ट्र-राज्यों के आधार पर वर्गीकरण, सामाजिक-आर्थिक प्रणालियों के आधार पर वर्गीकरण, इत्यादि। समाज ऐतिहासिक विकास की प्रक्रिया को आधार बनाकर विश्व के भू-भागों को दो श्रेणियों में विभक्त किया जा कसता है: ग्रामीण क्षेत्र एवं नगरीय… Read More »

जनजातीय विकास क्या है?

जनजातीय विकास का आशय है जनजातीय आबादी की अधिकारहीनता की प्रस्थिति को सुधारते हुए उनके जीवन में गुणात्मक उन्नति करना। भारत का संविधान अनुसूचित जनजातियों को वैधानिक संरक्षण एवं सुरक्षा प्रदान करता है ताकि उनकी सामाजिक निर्योंग्यताएं हटाई जा सकें तथा उनके विविध अधिकारों को बढ़ावा मिल सके। संवैधानिक प्राविधानों के अतिरिक्त जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक… Read More »

समुदाय का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, प्रकृति एवं विशेषताएं

समुदाय शब्द लैटिन भाषा के (com) तथा ‘Munis’ शब्दों से बना है। com का अर्थ हैं Together अर्थात एक साथ तथा Munis का अर्थ Serving अर्थात सेवा करना। इस प्रकार समुदाय का अर्थ एक साथ मिलकर सेवा करना है। अन्य शब्दों में हम कह सकते हैं कि व्यक्तियों का ऐसा समूह जिसमें परस्पर मिलकर रहने की भावना… Read More »

सामुदायिक संगठन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं सिद्धांत

सामुदायिक संगठन साधारण बोलचाल में सामुदायिक संगठन का अभिप्राय: किन्ही समुदाय की आवश्यकताअें तथा साधनों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने से है। सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। इस रूप में सामुदायिक संगठन का तात्पर्य किस समुदाय या समूह में लोगों द्वारा आपस में मिलकर कल्याण कार्यो की योजना बनाना तथा इसके… Read More »