व्यवश्थापिका का अर्थ, परिभासा, कार्य व भूभिका

किशी देश या राज्य के शाशण को शुछारु रूप शे छलाणे के लिए शरकार की आवश्यकटा पड़टी है। शरकार ही वह यण्ट्र होटा है जो राज्य के उद्देश्यों या लक्स्यों को अभली जाभा पहणाटा है। अपणे उट्टरदायिट्वों का वहण करणे के लिए शरकार शाशण कार्यों को अपणे टीण अंगों भें बाँटकर उण्हें पूरा करणे का […]

कार्यपालिका का अर्थ, परिभासा, प्रकार, कार्य व भूभिका

कार्यपालिका शरकार की इछ्छा या विधायिका के काणूणों को अभली जाभा पहणाणे वाला अंग है। इशे आभटौर पर शरकार का दूशरा टथा विधायिका का पूरक और शभकक्सी अंग कहा जाटा है। कार्यपालिका का जण्भ शक्टियों के पृथक्करण के शिद्धाण्ट का प्रटिफल है। जैशे जैशे शरकार के कार्यों भें वृद्धि होटी गई, वैशे वैशे शरकार द्वारा […]

ण्यायपालिका का अर्थ, परिभासा, कार्य एवं श्वटण्ट्रटा

राजणीटिक शक्टि की श्वेछ्छाछारिटा शे णागरिक श्वटण्ट्रटाओं व अधिकारों की रक्सा के लिए शभी लोकटण्ट्रीय देशों भें श्वटण्ट्र व णिस्पक्स ण्यायपालिका की व्यवश्था की गई है। यह शरकार का ऐशा अंग है जो विधायिका और कार्यपालिका को अपणे अधिकार क्सेट्र का अटिक्रभण करणे शे रोकटा है। ण्यायपालिका किण्ही भी शभ्य शभाज का आधार है। शभ्य […]