Category Archives: सामुदायिक संगठन

सामुदायिक संगठन में निपुणता का आशय

सामुदायिक संगठन समाज कार्य की एक प्रणाली है। एक प्रणाली का अर्थ ज्ञान और सिद्धान्तों का योग ही नही है। प्रणाली का अर्थ ज्ञान और सिद्धान्तों का एक क्रियाकलाप में इस प्रकार प्रयोग कि उससे परिवर्तन हो जाए। यही निपुणता कहलाती है। इसे वर्जीनिया रॉबिन्सन (Virginia Robinson) ने किसी विशेष पदार्थ में परिवर्तन की एक… Read More »

सामुदायिक संगठन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं सिद्धांत

सामुदायिक संगठन साधारण बोलचाल में सामुदायिक संगठन का अभिप्राय: किसी समुदाय की आवश्यकताअें तथा साधनों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने से है। सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। इस रूप में सामुदायिक संगठन का तात्पर्य किस समुदाय या समूह में लोगों द्वारा आपस में मिलकर कल्याण कार्यो की योजना बनाना तथा इसके… Read More »

सामुदायिक संगठन का ऐतिहासिक विकास

दान संगठन समिति आधुनिक सामुदायिक संगठन की आधार शिला थी। सन् 1889 में लंदन में इसलिये स्थापना की गयी जिससे दान या सहायता देने वाली संस्थायें यह जान सकें कि किसको किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है। सभी को बिना जॉच-पड़ताल किये आर्थिक सहायता न प्रदान करें। सन् 1877 में अमेरिका के बफैलो नगर… Read More »

सामुदायिक संगठन की विधियॉ या प्रणालियॉ

सामुदायिक संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति उन संस्थाओं द्वारा, जो सामुदायिक संगठन में लगी रहती है। विशेष प्रकार के क्रियाकलापों द्वारा की जाती है। क्रियाकलापों और विधि या प्रणाली के भेद को इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है। क्रियाकलाप एक विशेष परियोजना या सेवा होती है जो प्रणली के प्रयोग होने के परिणामस्वरूप् की… Read More »

सामुदायिक संगठन की प्रक्रिया

ग्रामीण जीवन पर सामुदायिक योजना के प्रभाव  सामुदायिक विकास योजना ,ग्रामीण जीवन के आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृति विकास में अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। इस योजना के सामाजिक प्रभावों को केवल इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि एक सामान्य ग्रामीण का जीवन पहले की अपेक्षा न केवल काफी खुशहाल और सम्पन्न दिखाई देता… Read More »

सामुदायिक संगठन के प्रारूप,आयाम एवं रणनीतियां

वर्तमान सामुदायिक जीवन के अध्ययन व अवलोकन से ज्ञात होता है कि पूर्व सामुदायिक जीवन की अपेक्षा वर्तमान सामुदायिक जीवन से विभिन्न परिवर्तन हुये है जैसे कि औद्योगीकरण, नगरीकरण, यातायात और संचार की सुविधाओं इत्यादि प्रगति के कारण सामुदायिक जीवन में परिवर्तन सम्भव हुआ है। इन सब प्रगति के फलस्वरूप सामुदायिक जीवन में विघटन, असंतोश, अपराध,… Read More »