Category Archives: हिंदी

हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण

‘हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण’ शीर्षक इस लेख में हिन्दी वर्तनी के मानकीकरण एवं उसकी आवश्यकता पर सविस्तार चर्चा की गई है। साथ ही मानक वर्तनी के प्रयोग का उदाहरण समझाया गया है। हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण  भारत के संविधान में हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। साथ ही कुछ… Read More »

राजभाषा हिन्दी के स्वरूप एवं क्षेत्र

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों अंग्रेजों के क्रूर अत्याचार व दमनात्मक शासन के कारण भारतीय जनमानस में अंग्रेजों के प्रति गहरी घृणा छा गई थी। विदेशियों से मुक्ति पाने की छटपटाहट से राष्ट्रीय आन्दोलन का सूत्रपात हुआ। स्वराज्य का सपना, स्वदेशी की चाहत, स्वभाषा की मिठास और स्वतंत्रता की आकांक्षा इसी समय की उपज है। ‘स्वदेशी… Read More »

हिंदी की संवैधानिक स्थिति

अनुच्छेद 343 : संविधान के अनुसार हिंदी राजभाषा और लिपि देवनागरी होगी। यहाँ यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजकीय कार्यों में नागरी का अन्तर्राष्ट्रीय रूप ही होगा। अर्थात् नागरी के मूल चिन्हों के स्थान पर अन्तर्राष्ट्रीय चिन्ह प्रयुक्त होंगे। इसी धारा के भाग दो में स्पष्ट किया गया है कि 15 वर्षों तक… Read More »

हिन्दी भाषा के विविध रूप

भाषा का सर्जनात्मक आचरण के समानान्तर जीवन के विभिन्न व्यवहारों के अनुरूप भाषिक प्रयोजनों की तलाश हमारे दौर की अपरिहार्यता है। इसका कारण यही है कि भाषाओं को सम्प्रेषणपरक प्रकार्य कई स्तरों पर और कई सन्दर्भों में पूरी तरह प्रयुक्त सापेक्ष होता गया है। प्रयुक्त और प्रयोजन से रहित भाषा अब भाषा ही नहीं रह… Read More »

सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी

भारत जैसे बहुभाषा-भाषी देश में सम्पर्क भाषा की महत्ता असंदिग्ध है। इसी के मद्देनजर ‘सम्पर्क भाषा (जनभाषा) के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस अध्याय में सम्पर्क भाषा का सामान्य परिचय देने के साथ-साथ सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी के स्वरूप एवं राष्ट्रभाषा और सम्पर्क भाषा के अंत:सम्बन्ध पर भी विचार किया गया है। सम्पर्क… Read More »

राष्ट्रभाषा तथा राजभाषा के रूप में हिन्दी

‘राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी’ शीर्षक इस लेख में राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा का सामान्य परिचय व उनके स्वरूप की चर्चा की गई है। इसके अलावा राजभाषा की विशेषताएँ एवं उसके प्रयोग क्षेत्र पर भी सविस्तार विचार किया गया है। राष्ट्रभाषा बनाम राजभाषा  समाज में जिस भाषा का प्रयोग होता है साहित्य की भाषा… Read More »

राजभाषा हिंदी सम्बन्धी विभिन्न समितियां

हिन्दी सलाहकार समितियाँ  भारत सरकार की राजभाषा नीति के सूचारू रूप से कार्यान्वयन के बारे में सलाह देने के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में हिन्दी सलाहकार समितियों की व्यवस्था की गई। इस समितियों के अध्यक्ष सम्बन्धित मंत्री होते हैं और उनका गठन ‘केन्द्रीय हिन्दी समिति’ (जिसके अध्यक्ष माननीय प्रधानमंत्री जी हैं) सिफारिश के आधार पर… Read More »

हिंदी की उपभाषाएँ एवं प्रमुख बोलियां

भारत का उत्तर और मध्य देश बहुत समय पहले से हिंदी-क्षेत्र नाम से जाना जाता है। हिंदी-प्रयोग-क्षेत्र के विस्तृत होने के कारण अध्ययन सुविधा के लिए उसे विविध वर्गो में विभक्त किया गया है। जॉर्ज इब्राहिम ग्रियर्सन ने हिंदी के मुख्य दो उपवर्ग बनाए हैं – (1) पश्चिमी हिंदी, (2) पूर्वी हिंदी। उन्होंने बिहारी को… Read More »