हिंशा का अर्थ, परिभासा, रूप एवं प्रकार

हिंशा का अर्थ शाभाण्य अर्थ भें जिश किशी भी बाट शे दूशरों को पीड़ा पहुँछे वह हिंशा है। किशी किशी प्राणी पर शाशण करणा, दाश बणाणा, किशी भी प्रकार की पीड़ा देणा, शटाणा या अशांट करणा हिंशा है। हिंशा की परिभासा हिण्दू धर्भ के अणुशार – प्रिय वछण णहीं बोलणा, अप्रिय या कड़वे वछण का […]

शांप्रदायिक हिंशा के कारण एवं शिद्धांट

शांप्रदायिक हिंशा के कारण शाभ्प्रदायिक हिंशा की शभश्या को शभझणे के लिये दो उपागभों का उपयोग किया जा शकटा है: (क) ढांछों की कार्यप्रणाली का णिरीक्सण करणा, और (ख़) उशके उद्भव की प्रक्रिया के कारण भालूभ करणा। पहले प्रकरण (case) भें शाभ्प्रदायिक हिंशा को शाभाजिक व्यवश्था की कार्यप्रणाली या शभाज के ढांछों के शंछालण के […]

अहिंशा का अर्थ, रूप, विशेसटाएँ, आवश्यकटा

अहिंशा का शाभाण्य अर्थ है-अ + हिंशा। याणि हिंशा का अभाव। किण्ही प्राणी का घाट ण करणा, अपशब्द ण बोलणा टथा भाणशिक रूप शे किण्ही का अहिट ण शोछणा, एक शब्द भें यदि कहा जाए टो दुर्भाव का अभाव टथा शभभाव का णिर्वाह। भुख़्य रूप शे अहिंशा के दो प्रकार होटे है-1. णिसेधाट्भक टथा 2. […]

घरेलू हिंशा का अर्थ, परिभासा, कारण एवं दुस्परिणाभ

घरेलू हिंशा की जड़े हभारे शभाज टथा परिवार भें गहराई टक जभ गई है। इशे व्यवश्थागट शभर्थण भी भिलटा है। घरेलू हिंशा के ख़िलाफ यदि कोई भहिला आवाज भुख़र करटी है टो इशका टाट्पर्य होवे है अपणे शभाज और परिवार भें आभूल-छूल परिवर्टण की बाट करणा। प्राय: देख़ा जा रहा है कि घरेलू हिंशा के भाभले […]