Category Archives: Indian History

महिला सशक्तिकरण

 आज के माहौल में महिला सशक्तिकरण की बात करने से पहले हमें सवाल का जवाब ढूंढना जरूरी है कि क्या वास्तव में महिलायें अशक्त हैं? यदि अशक्त है तो इतने सारे संवैधानिक उपायों के बाद भी महिलाएं विकास की मुख्य धारा से क्यों नहीं जुड सकी? इतिहास गवाह है कि मानव सभ्यता के विकास के… Read More »

बिहार में सरकारी दषा दयनीय

   बिहार में विगत तीन दषकों से उर्दू राज्य की दूसरी सरकारी जुबान है। लेकिन इस के बावजूद राज्य में उर्दू की दषा दयनीय है और इस के लिए किसी एक राजनैतिक पार्टी या सरकार को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। क्योंकि इस तवील अरसे में कई सियासी पार्टियाॅ सत्ता में रही हैं। ज्ञातव्य… Read More »

ओसाका में भारतः सुदृढ़ व संतुलित

 ओसाका में भारतः सुदृढ़ व संतुलित भारत ने ओसाका में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में डिजिटल व्यापार, भ्रटाचार विरोधी नियम एवं पर्यावरण नीतियों से लेकर आर्थिक उन्नति तक अनेक मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया। पूर्व राजदूत भस्वति मुखर्जी ने कुछ मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया वैष्विक अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए जी20 के रूप में… Read More »

बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या

बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या सामूहिक ‘योजक’ निर्देश विभिन्न विषयों की तालिकाओं में अनेक स्थानों पर मिल जाते हैं। निम्नलिखित उदाहरणों में सामूहिक ‘योजक’ निर्देशों का पालन करते हुए संश्लेषित वर्ग संख्या का निर्माण किया गया है:(a) शीर्षक First aid in heart diseases की वर्ग संख्या का निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम तृतीय… Read More »

शीर्षक – प्रायोगिकी की पत्रिका

 शीर्षक – प्रायोगिकी की पत्रिका Journal of Technology 605खण्ड दो की अनुसूची में Serial Publictions of Technology का अंकन 605 (V2, P824) दिया गया है। इस शीर्षक में भी मुख्य आधार अंक 600 से दोनों शून्य अंकों को छोड़कर शेष अंक 6 के साथ मानक उपविभाजन अंकन 05 को जोड़ा गया है।6 + 05 =… Read More »

ग्रन्थांक निर्माण करने के पक्ष-परिसूत्र का उल्लेख

ग्रन्थांक निर्माण करने के पक्ष-परिसूत्र का उल्लेख इस भाग में वर्गीकरण की विभिन्न अनुसूचियों का उल्लेख है। वर्ग संख्याओं का निर्माण करने के लिये संबंधित अनुसूचियों से एकल संख्यायें प्राप्त की जाती हैं।अध्याय 02 में ग्रन्थांक निर्माण करने के पक्ष-परिसूत्र का उल्लेख है तथा ग्रन्थांक में प्रयोग में लाये जाने वाले रूप (Form) उप विभाजनों… Read More »

अंकन के प्रकार (Type of Notation) विषयों / प्रलेखों को सहायक अनुक्रम

अंकन के प्रकार (Type of Notation) विषयों / प्रलेखों को सहायक अनुक्रम अर्थात विषयों / प्रलेखों को सहायक अनुक्रम में व्यवस्थित करना है । अंकन के द्वारा प्रत्येक प्रलेख को एक वर्ग संख्या प्रदान की जाती है, जिसके अनुसार वर्गीकृत व्यवस्था यंत्रवत बन जाती है | इस व्यवस्था का लाभ यह है कि पाठक दवारा… Read More »

गुप्तकाल हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान का काल था। प्रमाणित कीजिए।

गुप्तकाल हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान का काल था। प्रमाणित कीजिए। गुप्त कालीन आर्थिक जीवन – गुप्त साम्राज्य के विस्तृत क्षेत्र पर प्रभाव एवं आधिपत्य तथा कुशल प्रशासनिक व्यवस्था के कारण देश में शान्ति रही। इससे आर्थिक जीवन समृद्ध एवं विभिन्न साधनों की उत्पत्ति में वृद्धि हो सकी । तत्कालीन आर्थिक स्थिति से सम्बन्धित पहलुओं का… Read More »

गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का वर्णन कीजिए।  Describe the Administration system of Gupta Empire. गुप्त शासन व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।Give an out line of the Gupta Administration. गुप्त साम्राज्य की आय के साधन –  राज्य की आमदनी का मुख्य स्रोत भूमि कर या लगान था जो भूमि की किस्म को देखकर 16 प्रतिशत से… Read More »

Describe the Salient features of the Gupta Administration.

Describe the Salient features of the Gupta Administration. (1) गुप्त काल में जिलों का शासन –  प्रान्तों से छोटी इकाई प्रदेश कहलाती थी जो आजकल की कमिश्नरी के बराबर होती थी और इससे छोटी इकाई विषय कहलाती थी जो जिले के बराबर होती थी। विषयों का शासन विषयपति कुमारामात्य अथवा महाराज करते थे। विषयपति की… Read More »