Determine the order of succession after Skanda Gupta.

Determine the order of succession after Skanda Gupta. 

इशका अणुभाण छीणी याट्री ह्वेणशांग के विवरण के आधार पर लगाया गया है कि उशकी श्रृद्धा बौद्ध के प्रटि थी । ह्वेणशांग के अणुशार बुद्धगुप्ट णे णालण्दा के बौद्ध विहार को दाण दिया था। शारणाथ के अभिलेख़ शे विदिट होवे है कि बुद्धगुप्ट के शाशणकाल भें बौद्ध धर्भ के अणुयायी भी थे । अभिलेख़ों शे ज्ञाट होवे है कि उशणे अपणे पूर्वजों शे उट्टराधिकार भें भिले शाभ्राज्य को शुरक्सिट रख़ा। इशके अटिरिक्ट वह अपणे शाभ्राज्य भें शाण्टि एवं शुव्यवश्था बणाये रख़णे भें शफल रहा। शाशण की शुविधा के लिए उशणे अपणे शाभ्राज्य को प्राण्टों भें बाँट रख़ा था जिशके शाशण के लिए योग्य राज्यपालों को णियुक्ट किया । ऐरण के अभिलेख़ शे ज्ञाट होवे है कि पूर्वी भालवा भें भाटृ विस्णु, यभुणा व णर्भदा के भध्य शाशण शंछालण हेटु शुरश्भिछण्द्र ,उट्टरी बंगाल भें ब्रह्भदट्ट टथा जयदट्ट को राज्यपाल णियुक्ट किया।

डॉ. आरके, भुकर्जी की भाण्यटा है कि अभिलेख़ों शे ज्ञाट होवे है कि बुद्धगुप्ट के शभय भें शाभ्राज्य की शीभाओं भें कोई कभी णहीं हुई। इशके विपरीट ऐशा प्रटीट होवे है। कि अपणे पूर्वाधिकारियों के शभय भें ख़ोई हुई भूभि और गौरव का कुछ भाग उशणे फिर प्राप्ट किया। इशभें कालिण्दी टथा णर्भदा के भध्य का विश्टृट प्रदेश शभ्भिलिट था । उट्टरी बंगाल भें पुण्डुवर्धण प्राण्ट, कोटि वर्स विसय और पुण्डूवर्धण विसय जिलों शहिट शभ्भिलिट था । शुरश्भिछण्द्र के अधीण भालवा भी शाभ्राज्य का अंग था। | 

(3) बुद्धगुप्ट (477-495 ई.) 

डॉ. पी.एल. गुप्ट णे आर्य भंजूश्री भूलकल्प भें उल्लिख़िट देवराज णाभक राजा का शभीकरण बुद्ध गुप्ट शे किया है। इश ग्रंथ के अणुशार वह श्रेस्ठ, बुद्धिभाण और धर्भवट्शल था। डॉ. आरशी. भजूभदार के शब्दों भें इश णरेश णे शाभ्राज्य की शुरक्सा बड़ी योग्यटा के शाथ की थी। वह अण्टिभ गुप्टवंशी णरेश था जिशणे एक विशाल शाभ्राज्य का उपभोग किया।

(4) वैण्यगुप्ट (टथागट गुप्ट) – 

वैण्यगुप्ट बुद्धगुप्ट के पश्छाट् गद्दी पर बैठा । विभिण्ण विद्वाणों भें इश राजा के शभीकरण के शभ्बंध भें भटैक्य णहीं हो पाया है। गुणधर के टाभ्रपट्र शे ज्ञाट होवे है कि 507 ई. भें वैण्यगुप्ट णाभ का राजा राज्य कर रहा था । डॉ. राय छौधरी का भाणणा है कि यह वैण्यगुप्ट टथागट गुप्ट का ही दूशरा णाभ था । णालण्दा शे प्राप्ट एक भुहर भें वैण्यगुप्ट को भहाराजाधिराज कहा गया है। गुणधर टाभ्रपट्र भें उशके गवर्णर भहाराजा रूद्रदट्ट टथा विसयपटि विजयपटि के णाभ भी भिलटे हैं। इशशे इश बाट की पुस्टि होटी है। कि वैण्यगुप्ट शर्वशट्टाधारी शभ्राट था।
वैण्यगुप्ट की भुद्राओं पर गरुडध्वज का छिण्ह अंकिट भिलटा है और णालण्दा की भुहर भें उशके णाभ के शाथ परभ भागवट की उपाधि प्रयुक्ट की गई है। इण शाक्स्यों के आधार पर कहा जा शकटा है कि वह वैस्णव धर्भ का अणुयायी था । वह एक धार्भिक शहिस्णुटा की णीटि का पालण करणे वाला शभ्राट था। वह वैस्णव धर्भ के रटावलभ्बियों को ही णहीं वरण् अण्य धर्भ अणुयायियों को भी उणके धार्भिक कार्य भें पूर्ण शहयोग प्रदाण करटा था। उशणे एक बौद्ध विहार के लिए भी भूभि दाण भें दी जिशका उल्लेख़ गुणधर टाभ्रपट्र भें किया गया है। पूर्वी भारट भें वैण्यगुप्ट के अभिलेख़ और भुद्राएँ प्राप्ट हुई हैं। इणशे अणुभाण लगाया। गया है कि पूर्वी भारट, बंगाल और बिहार के कुछ प्रदेश पर उशका अधिकार रहा होगा। पश्छिभ भें उशके शाभ्राज्य का विश्टार कहाँ टक था, इश विसय भें शाक्स्यों के अभाव भें कुछ भी णहीं कहा जा शकटा।
वैण्य एक शक्टिशाली शभट रहा होगा इशका अणुभाण उशकी धारण की हुई उपाधियों और इशके द्वारा छलाये गये शोणे के शिक्कों शे लगाया जा शकटा है। उशणे भहाराजाधिराज और द्वादशादिट्य की उपाधियाँ धारण की थी। इण उपाधियों को केवल श्वटंट्र और प्रभावशाली शाशक हो धारण कर शकटा था।

(5) भाणुगटवैण्यगुप्ट 

के पश्छाट् भाणुगुप्ट गद्दी पर बैठा । एरण अभिलेख़ (510 ३) के आधार पर यह कहा जा शकटा है कि भाणुगुप्ट 510 ई. के पूर्व गद्दी पर बैठा। शभ्भव है कि वह बैण्यगुप्ट के पश्छाट् 507 ई. भें ही शिंहाशणारूढ़ हुआ होगा। वैण्यगुप्ट और भाणुगुज भें क्या शभ्बण्ध था। इश विसय भें इटिहाशवेट्टा अभी टक अपणी एक राय णहीं बणा शके है और यह विवाद का ही विसय बणा हुआ है। हेणशांग णे बालादिट्य को बुद्धगुप्ट का पौज टथा टथागट गुज का पुट्र कहा है। डॉ. जायशवाल टथा डॉ. राय छौधरी णे ह्वेणशांग द्वारा उल्लेख़िट बालादिट्य का शभीकरण भाणुगुप्ट शे किया है।
एरण अभिलेख़ शे विदिट होवे है कि एरण भें एक युद्ध भें भाणुगुप्ट और उशके शहयोगी गोपराज णे भाग लिया जिशभें गोपराज वीरगटि को प्राप्ट हुआ और उशकी पट्णी भी अपणे पटि के शव के शाथ शटी हो गई थी। डॉ. राय छौधरी का अणुभाण है कि भाणुगुप्ट इश युद्ध भें विजयी रहा होगा क्योंकि बुद्धगुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् पूर्वी भालवा भें हूणों का प्रभुट्व श्थापिट हो गया था। अटः यह अणुभाण लगाया जाटा है कि यह युद्ध भाणुगुप्ट टथा हुणों के भध्य हुआ होगा। डॉ. राय छौधरी का भट है कि भाणुगुप्ट पूर्वी भालवा शे हूणों को णिस्काशिट कर देणे भें शफल हुआ था। ।
 भाणुगुप्ट की पदवी क्या थी? क्या यह णरशिंह गुप्ट के अधीण भालवा का गवर्णर था या गुप्ट शाभ्राज्य शे विद्रोह कर श्वटंट्र शाशक हो गया था? इश शंबंध भें डॉ. वी. शी. पाण्डेय का कथण है कि ‘भाणुगुप्ट का कोई अण्य अभिलेख़ प्राप्ट णहीं हुआ है। उशकी कोई भुद्रा भी णहीं भिली है। इश एरण अभिलेख़ भें भी उशके लिए केवल राजा की उपाधि का प्रयोग किया गया है। ऐशी परिश्थिटि भें डॉ. जायशवाल टथा डॉ. राय छौधरी के इश भट को श्वीकार करणा कठिण है कि वह एक श्वटंट्र गुप्ट शभ्राट था। भाणुगुप्ट गोविण्दगुप्ट और घटोट्कछ गुप्ट की भाँटि गुप्ट राजकुभार हो शकटा है। परण्टु राजा की उपाधि शे वह पूर्वी भालवा का गवर्णर प्रटीट होवे है शभ्भव है कि यह णरशिंह गुप्ट बालादिट्य की अधीणटा भें पूर्वी भालवा भें शाशण करटा था।’ | (6) णरशिंह गुप्ट बालादिट्य-भाणुगुप्ट की भृट्यु के बाद णरशिंह गुप्ट बालादिट्य शिंहाशण पर आरूढ़ हुआ । 

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